Friday, April 4, 2025

शेयर बाजार को फिर लगा मंदी का ‘पंच’, निवेशकों के दो दिन में डूबे 6.40 लाख करोड़

इससे पहले सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार 7 कारो​बारी दिनों में इजाफा देखने को मिला है. इस दौरान शेयर बाजार निवेशकों को 5.7 फीसदी का रिटर्न दिया है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर बुधवार को शेयर बाजार के आंकड़े किस तरह के देखने को मिल रहे हैं,

 

शेयर बाजार को एक बार फिर से मंदी का पंच लगा है. जिसकी शुरुआत 25 मार्च को ही हो गई थी. इस पंच की वजह से शेयर बाजार निवेशकों को दो दिनों में करीब 6.40 लाख करोड़ रुपए डूब गए हैं. खास बात तो ये है कि मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मामूली तेजी के साथ बंद हुए थे. उसके बाद भी निवेशकों को 3.34 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा था. वहीं बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी 1 फीसदी गिरावट देखने को मिल रही है. जिसकी वजह से निवेशकों को कारोबारी सत्र के दौरान करीब 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है,

शेयर बाजार में जिस मंदी के पंच की बात हो रही है, उसमें यूएस टैरिफ की अनिश्चितता, तेजी के बाद बि​कवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, हैविवेट शेयरों में गिरावट और डॉलर इंडेक्स में इजाफा है. ये पांचों चीजें किसी भी सूरत में भारतीय शेयर बाजार के लिए ठीक नहीं है. इससे पहले सेंसेक्स और निफ्रटी में लगातार 7 कारो​बारी दिनों में इजाफा देखने को मिला है. इस दौरान शेयर बाजार निवेशकों को 5.7 फीसदी का रिटर्न दिया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर बुधवार को शेयर बाजार के आंकड़े किस तरह के देखने को मिल रहे हैं.

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिल रही है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक संसेक्स दोपहर तीन बजे करीब 800 अंकों की गिरावट के साथ 77,237.24 अंकों पर कारोबार कर रहा है. कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 77,229.77 अंकों के दिन के लोअर लेवल पर भी गया. वैसे सुबह के शुरूआती सत्र में सेंसेक्स 78,021.45 अंकों के साथ ओपन हुआ था और 78,167.87 अंकों के दिन के हाई पर ओपन हुआ था. खास बात मंगलवार कों सेंसेक्स 33 अंकों की तेजी साथ बंद हुआ था. वहीं दूसरी ओर निफ्टी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही हे. आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 205 अंकों की गिरावट कारोबार कर रहा है. दोपहर 3 बजे निफ्टी 23,463.65 अंकों पर देखने को मिला. खास बात तो ये है कि 23,700.95 अंकों पर ओपन हुआ था. कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 23,451.70 अंकों दिन के लोअर लेवल पर भी गया. इससे पहले लगातार 7 ​कारोबारी दिनों में निफ्टी 5.7 फीसदी की तेज देखने को मिली है

निवेशकों को मोटा नुकसान

इस दौरान निवेशकों को भी मोटा नुकसान हुआ है. आंकड़ों को देखें तो बीएसई का मार्केट कैप निवेशकों की कमाई से जुड़ा हुआ होता है. एक दिन पहले बीएसई का मार्केट कैप 4,14,94,992.3 करोड़ रुपए था. जो बुधवार को कारोबारी सत्र के दौरान गिरकर 4,11,88,539.61 करोड़ रुपए हो गया. इसका मतलब है कि बीएसई के मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा साफ हो गए. वहीं दूसरी ओर 24 मार्च को बीएसई का मार्केट कैप 4,18,29,351.91 करोड़ रुपए था, जिसमें अब तक 6.40 लाख करोड़ रुपए की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

शेयर बाजार के गिरने के 5 कारण

अमेरिकी टैरिफ पर अनिश्चितता

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के तहत संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर निवेशक सतर्क हैं. जबकि रिपोर्ट के अनुसार सभी प्रस्तावित टैरिफ 2 अप्रैल की समयसीमा तक प्रभावी नहीं होंगे, लेकिन स्पष्टता की कमी ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता को बढ़ावा दिया है. ट्रेड टेंशन में कोई भी ग्रोथ भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकती है, विशेष रूप से आईटी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में, जिनका अमेरिकी बाजार में काफी बड़ा रिस्क देखने को मिल रहा है|

दिग्गज शेयरों में गिरावट

बैंकिंग, फाइनेंस और आईटी सेक्टर के शेयरों ने बाजार पर दबाव डाला. एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक ने मिलकर सेंसेक्स में 440 अंकों की गिरावट में योगदान दिया. ग्लोबल ब्रोडर आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा.

डॉलर इंडेक्स और यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल

यूएस डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसीज के मुकाबले डॉलर को ट्रैक करता है, 103 के लेवल पर कुछ समय तक गिरने के बाद 0.12 फीसदी बढ़कर 104.31 पर पहुंच गया. मजबूत डॉलर आमतौर पर भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी फंड के बाहर निकलने की ओर ले जाता है, जिससे बाजार में कमजोरी बढ़ती है. इस बीच, यूएस 10 साल ट्रेजरी यील्ड पिछले शुक्रवार को 4.25 फीसदी से बढ़कर 4.32 फीसदी हो गई. हाई बॉन्ड यील्ड निवेशकों के लिए यूएस असेट्स को अधिक आकर्षक बनाती है, जिससे उभरते बाजारों से ग्लोबल कैपिटल का पलायन होता है और भारतीय इक्विटी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

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