Ujjain: उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को लेकर तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। शनिवार को सिंहस्थ मेला कार्यालय में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अहम बैठक हुई, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए ट्रैफिक, पार्किंग, क्राउड मैनेजमेंट, होल्डअप एरिया और निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। खासतौर पर प्रस्तावित 22 ब्रिज और सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।
सिंहस्थ की तैयारियों पर मंथन
उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और शहर में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर शनिवार को सिंहस्थ मेला कार्यालय में जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सिंहस्थ की प्लानिंग, निर्माण कार्यों की मौजूदा स्थिति और आने वाले समय में की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। इस दौरान सांसद अनिल फिरोजिया, महापौर मुकेश टटवाल, मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
ट्रैफिक और पार्किंग पर खास फोकस
बैठक में सिंहस्थ के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने पर विशेष चर्चा हुई। ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग व्यवस्था, क्राउड मैनेजमेंट और होल्डअप एरिया को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे, ऐसे में ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए जिससे श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय नागरिकों को भी किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
22 ब्रिज और सड़कों के काम की समीक्षा
बैठक में सिंहस्थ के लिए प्रस्तावित 22 ब्रिजों, निर्माणाधीन सड़कों और शहर के आंतरिक मार्गों को चौड़ा करने के कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की प्रगति और आगामी कार्ययोजना के बारे में जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों ने यातायात को सुगम बनाने और प्रमुख मार्गों पर दबाव कम करने के लिए जरूरी सुझाव भी दिए।
समयसीमा और गुणवत्ता पर जोर
सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से कहा कि सभी निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। साथ ही काम की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए। बैठक में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं की प्लानिंग करने और श्रद्धालुओं के साथ शहरवासियों की सुविधा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।






