Bhopal: मध्य प्रदेश की राजनीति में स्कूलों में जन्माष्टमी मनाने का फैसला नया सियासी मुद्दा बन गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रदेश के सभी स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन कार्यक्रमों में कृष्ण लीला, गीता की शिक्षाओं पर सत्र, नाटक, नृत्य और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन से जुड़ी गतिविधियां शामिल होंगी। वहीं संदीपनी स्कूलों में गुरु-शिष्य परंपरा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव से जोड़ना है।
बीजेपी ने फैसले को बताया संस्कृति से जोड़ने वाली पहल
बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन आदर्शों और मूल्यों से भरा हुआ है, इसलिए स्कूलों में जन्माष्टमी मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सरकारी आवासों में इफ्तार पार्टियां आयोजित की जाती थीं और कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है। बीजेपी ने इस पहल को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने वाला कदम बताया।
धर्मगुरु ने कहा- बच्चों को सनातन परंपराओं की जानकारी जरूरी
जन्माष्टमी आयोजन के फैसले का हिंदू धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने भी समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन भारत में बच्चों को हिंदू देवी-देवताओं और सनातन परंपराओं की जानकारी दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके विचारों से बच्चों को आदर्श, संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख मिल सकती है। उन्होंने स्कूलों में जन्माष्टमी आयोजन को भारतीय परंपराओं से विद्यार्थियों को जोड़ने की पहल बताया।
मुस्लिम स्कॉलर ने उठाए सवाल, धार्मिक संतुलन की मांग
वहीं मुस्लिम स्कॉलर तौकीर निजामी ने स्कूलों में जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को किसी भी स्कूल को किसी धर्म विशेष का धार्मिक आयोजन करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा के केंद्र हैं और वहां धार्मिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उनका सुझाव है कि यदि स्कूलों में अलग-अलग धर्मों के त्योहारों और परंपराओं से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, तो सभी धर्मों को समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इस तरह जन्माष्टमी के फैसले ने मध्य प्रदेश में शिक्षा, संस्कृति और धर्म को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।







