Last Updated:November 09, 2025, 11:45 IST
Viral Post: सोशल मीडिया पर एक डॉक्टर का पोस्ट वायरल हो रहा है. इस शख्स ने 2019 का किस्सा शेयर किया है. तब उन्हें मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का मौका मिला था लेकिन फीस के चक्कर में उन्होंने 1 साल का गैप ले लिया था.
MBBS Story: एमबीबीएस कॉलेज की फीस करोड़ों में पहुंच जाती है
नई दिल्ली (Viral Post). भारत में मेडिकल की पढ़ाई बहुत मुश्किल है. पहले नीट परीक्षा पास करो, फिर उसमें रैंक के आधार पर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलेगा. सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल गया तो बढ़िया वरना प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फीस भरने के लिए तो लोन लेने तक की नौबत आ जाती है. गोवा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉ. अंशुल सधाले ने 2019 का एक किस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया है, तब उन्हें एक निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल रहा था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया.
वायरल पोस्ट में डॉ. अंशुल सधाले ने लिखा कि नीट परीक्षा के पहले अटेंप्ट में उन्होंने 1 लाख के करीब रैंक हासिल की थी. नीट यूजी काउंसलिंग में उन्हें निजी मेडिकल कॉलेज मिला, जिसकी फीस 1 करोड़ के आस-पास थी. उनके पिता ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके पास फीस भरने लायक रकम है. लेकिन अंशुल शॉर्टकट से डॉक्टर नहीं बनना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने 1 साल का गैप ईयर लेकर फिर से नीट परीक्षा देने का फैसला किया. अगले अटेंप्ट में 720 में से 633 अंक हासिल कर उन्हें सरकारी कॉलेज में MBBS सीट मिल गई.
MBBS Story: पापा के पैसे से नहीं चाहिए थी पहचान
डॉ. अंशुल सधाले (Dr. Anshul Sadhale) सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की सीट लेना आसान रास्ता था, लेकिन उन्हें डर था कि इससे उनकी पहचान हमेशा ‘पापा के पैसे’ से जुड़ी रहेगी. वह इस बात पर गर्व महसूस नहीं कर पाते कि उन्होंने मेहनत के बजाय डोनेशन का रास्ता चुना. उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि वह कॉन्फिडेंस और आत्म-निर्भरता के साथ डॉक्टर बनना चाहते थे.
it’s june 2019.
i have secured a rank of 1 lakh plus in my first Neet attempt.
my dad comes to my room and says,
“we have saved this much amount of money so you don’t have to struggle.”
i knew it was a lie, we couldn’t afford this without loan.
मिडिल क्लास के लिए सबसे मुश्किल फैसला
अंशुल सधाले ने इस फैसले को वित्तीय दृष्टिकोण से भी उचित ठहराया. उनका तर्क था कि आज के समय में एक साधारण MBBS सीट पर ₹1 करोड़ से ज्यादा खर्च करना गलत फाइनेंशियल डिसीजन है, खास तौर पर किसी मध्यवर्गीय भारतीय परिवार के लिए. इसलिए उन्होंने उस कॉलेज में एडमिशन लेने के बजाय एक साल और मेहनत करना बेहतर समझा.
मेरिट पर भरोसा और सफलता
एक साल का ड्रॉप ईयर लेने और कड़ी मेहनत करने के बाद अंशुल ने नीट यूजी में करीब 7,000 रैंक हासिल की. उन्हें मेरिट के आधार पर उनके राज्य के कॉलेज में सीट मिली. इस अनुभव ने न केवल उन्हें डॉक्टर बनाया, बल्कि मजबूत व्यक्तित्व भी दिया. मौजूदा दौर में डॉ. अंशुल सधाले न केवल डॉक्टर हैं, बल्कि उनकी कोचिंग भी है. सोशल मीडिया पर करीब 16 हजार यूजर्स उन्हें फॉलो करते हैं.
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With over more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academi…और पढ़ें
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First Published :
November 09, 2025, 11:45 IST
2019 की बात है, MBBS के लिए चाहिए थे 1 करोड़ ₹, गोवा के डॉक्टर ने ठुकराई सीट







