नई दिल्ली : भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है । करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए की इस डील में 18 विमान सीधे उड़ान के लिए तैयार हालत में मिलेंगे,जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा,जिनके लगभग 60% कलपुर्जे स्वदेशी होंगे । इन विमानों का निर्माण फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation के सहयोग से होगा । अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजा जाएगा । माना जा रहा है कि 17 से 19 फरवरी के बीच भारत दौरे पर आ रहे Emmanuel Macron के दौरान इस पर अंतिम मुहर लग सकती है । रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नए राफेल विमानों की खरीद से एयर डिफेंस और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती की क्षमता मजबूत होगी। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नौसेना के लिए 6 अमेरिकी Boeing P-8I सर्विलांस एयरक्राफ्ट, कॉम्बैट मिसाइलों और एयर-शिप आधारित हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट्स की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। सेना के लिए एंटी-टैंक माइंस (विभव), आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल, टी-72 टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल के ओवरहॉल को हरी झंडी मिली है। नौसेना के लिए 4 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन आधारित इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर और लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है । इसके साथ ही भारतीय तटरक्षक बल के लिए 8 Dornier 228 विमान खरीदने हेतु Hindustan Aeronautics Limited के साथ 2,312 करोड़ रुपए का समझौता किया गया है। यह खरीद ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत की गई है। केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 2.19 लाख करोड़ रुपए आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित हैं। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता, निगरानी तंत्र और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी ।
मेक इन इंडिया के तहत होगा सौदा
114 राफेल विमानों का यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किया जाएगा, जिसके तहत फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर भारत में ही विमानों का निर्माण करेगी। हाल ही में डसॉल्ट ने Dassault Reliance Aerospace Limited में अपनी हिस्सेदारी 49% से बढ़ाकर 51% कर ली है। इस संयुक्त उपक्रम में Reliance Infrastructure, जिसका नेतृत्व Anil Ambani करते हैं, भी भागीदार है। इस कदम से भारत में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलने और एयरोस्पेस सेक्टर में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। डसॉल्ट सभी 114 राफेल जेट में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद को इंटीग्रेट करेगा तथा सुरक्षित डेटा लिंक सिस्टम उपलब्ध कराएगा, जिससे विमान भारतीय रडार और सेंसर नेटवर्क से सीधे जुड़ सकेंगे। कंपनी एयरफ्रेम निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) भी देगी, जिसमें इंजन निर्माता Safran और एवियोनिक्स कंपनी Thales Group भी शामिल होंगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन विमानों में 55 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री होने की संभावना है, जिससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में मांग की थी
भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2025 में 114 अतिरिक्त राफेल जेट की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी, ताकि अपनी ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत किया जा सके। वर्तमान में वायुसेना के पास 36 राफेल विमान पहले से मौजूद हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। अंबाला एयरबेस पर राफेल के लिए ट्रेनिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से संचालित है। एयरफोर्स के पास तुरंत दो स्क्वाड्रन, यानी लगभग 36 से 38 विमानों को शामिल करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ भी उपलब्ध है, जिससे नए विमानों की तैनाती में तेजी लाई जा सकेगी।








