NEW DELHI: पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक हमले में शामिल आतंकियों के एनकाउंटर के बाद उनके पास से बरामद दो मोबाइल फोन की जांच में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है। एनआईए के अनुसार बरामद RedMi 9T और RedMi Note 12 मोबाइल चीन की कंपनी Xiaomi की सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचे थे, जहां कराची की कंपनी Tech Sirat Pvt Ltd ने इन्हें इम्पोर्ट कराया था । एनआईए की फोरेंसिक जांच में खुलासा हुआ कि आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमले की पहले से प्लानिंग कर रखी थी। मोबाइल के नेविगेशन एप AlpineQuest में बैसरन की लोकेशन सेव मिली,वहीं 15 और 16 अप्रैल को लिए गए घाटी के कई स्क्रीनशॉट भी बरामद हुए हैं । गौरतलब है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था । जांच एजेंसी अब मोबाइल सप्लाई चेन, पाकिस्तान कनेक्शन और आतंकियों के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ।
पाकिस्तान से आतंकियों तक पहुंचा फोन
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को बड़ा सुराग मिला है । जांच एजेंसी ने Redmi 9T मोबाइल के IMEI नंबर के आधार पर Xiaomi Global से संपर्क कर उसकी सप्लाई हिस्ट्री खंगाली, जिसमें सामने आया कि यह मोबाइल साल 2021 में पाकिस्तान पहुंचे एक बड़े कंसाइनमेंट का हिस्सा था । एनआईए के मुताबिक कराची की कंपनी Tech Sirat Pvt Ltd ने इस मोबाइल को इम्पोर्ट कराया था, जबकि इसकी फंडिंग और लॉजिस्टिक व्यवस्था पाकिस्तान के Faysal Bank द्वारा की गई थी । जांच में यह भी सामने आया कि मोबाइल की डिलीवरी कराची स्थित बैंक के हेड ऑफिस पते पर दर्ज थी । एनआईए के अनुसार यह मोबाइल चार साल तक निष्क्रिय रहा और साल 2025 में एक्टिव हुआ, जिसके बाद यह पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पास मिला। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल को किसी विशेष मकसद के लिए पहले से सुरक्षित रखा गया था और जरूरत पड़ने पर आतंकियों को सौंपा गया । वहीं Faysal Bank का नाम पहले भी आतंकवाद से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है, हालांकि बैंक इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
हमले से पहले एक्टिव हुआ Redmi Note 12
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एनआईए को दूसरे मोबाइल फोन Redmi Note 12 को लेकर भी बड़ा सुराग मिला है । जांच एजेंसी के मुताबिक यह फोन साल 2023 में पाकिस्तान की लाहौर स्थित Air Link Communications Limited द्वारा इम्पोर्ट किया गया था। एनआईए का कहना है कि इस फोन में भी वही पैटर्न सामने आया है, जो पहले बरामद मोबाइल में देखा गया था । जांच में खुलासा हुआ कि Redmi Note 12 को इम्पोर्ट के बाद लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया और इसे भी पहलगाम हमले से ठीक पहले एक्टिव किया गया था । एनआईए के अनुसार दोनों मोबाइल फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, सोशल मीडिया चैट या इंटरनेट कम्युनिकेशन डेटा नहीं मिला। जांच एजेंसी का मानना है कि आतंकी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की बजाय लंबी दूरी की रेडियो कम्युनिकेशन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे कई किलोमीटर दूर तक सुरक्षित संपर्क संभव हो पाता है और डिजिटल ट्रैकिंग से बचा जा सकता है।
पहलगाम हमले में GoPro कैमरा कनेक्शन
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एनआईए को एक और बड़ा सुराग मिला है। जांच एजेंसी के मुताबिक हमले में शामिल आतंकियों के पास से अमेरिकी कंपनी GoPro का हाई-टेक कैमरा बरामद हुआ था, जो चीन के रास्ते लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक पहुंचा था। यह कैमरा पिछले साल जुलाई में दाचीगाम के जंगलों में हुई मुठभेड़ के दौरान आतंकियों से बरामद किया गया था । एनआईए का मानना है कि इस कैमरे की सप्लाई चेन और नेटवर्क को समझने से उन गुप्त चैनलों का खुलासा हो सकता है, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों तक फंड, उपकरण और अन्य संसाधन पहुंचाते हैं। जांच एजेंसी ने GoPro Inc. से संपर्क किया, जहां कंपनी ने बताया कि कैमरा चीन स्थित अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर को भेजा गया था। अधिकारियों के मुताबिक आतंकी संगठन अब हमलों की रिकॉर्डिंग और प्रचार के लिए बॉडी कैमरा और एक्शन कैमरा जैसी हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। फिलहाल एनआईए चीन से आतंकियों तक कैमरा पहुंचाने वाले नेटवर्क, बिचौलियों और लोकल सपोर्ट सिस्टम की गहन जांच कर रही है ।
पहलगाम हमले में पाकिस्तान कनेक्शन उजागर
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर एनआईए की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है । जांच एजेंसी ने 15 दिसंबर 2025 को दाखिल चार्जशीट में दावा किया है कि 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ था । एनआईए के मुताबिक इस हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा है,जो पाकिस्तान के लाहौर के कसूर इलाके में रहता है । जांच एजेंसी के अनुसार साजिद जट्ट ही आतंकियों का मुख्य हैंडलर था और हमले के दौरान वह लगातार तीनों आतंकियों के संपर्क में बना हुआ था। एनआईए का कहना है कि वह आतंकियों को रियल टाइम डायरेक्शन दे रहा था और उसी ने हमले वाली जगह बैसरन वैली की लोकेशन भेजी थी। जांच में यह भी सामने आया है कि हमले के दौरान भी आतंकियों और उनके हैंडलर के बीच लगातार संपर्क बना रहा। एनआईए अब इस पूरे आतंकी नेटवर्क और पाकिस्तान कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।








