बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें चेक बाउंस मामले में बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में उनकी सजा को बरकरार रखते हुए अधिकारियों को उन्हें दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान अभिनेता के आचरण पर भी सवाल उठाए। यह मामला वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी एक फिल्म के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। आरोप है कि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया और संबंधित चेक भी बाउंस हो गया। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां लंबे समय से सुनवाई चल रही थी। अब हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अभिनेता की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
वर्ष 2010 से चल रहा है विवाद
राजपाल यादव से जुड़ा यह चेक बाउंस मामला करीब 16 साल पुराना है। इसकी शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब अभिनेता ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए बड़ी रकम का कर्ज लिया था । जानकारी के मुताबिक, राजपाल यादव ने फिल्म के निर्माण के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद वह तय समय पर कर्ज की राशि नहीं चुका पाए। भुगतान न होने के कारण मामला कानूनी विवाद में बदल गया, जो अब तक अदालत में चल रहा है।
कोर्ट ने जेल भेजने के दिए आदेश
चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को कोई राहत नहीं दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए सजा को बरकरार रखा और संबंधित अधिकारियों को उन्हें दोबारा जेल भेजने का निर्देश दिया । हाई कोर्ट ने कहा कि अभिनेता ने कई बार बकाया राशि चुकाने का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया । अदालत ने उनके रवैये को संदिग्ध मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया । इस आदेश के बाद राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।








