BHOPAL : मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की सोमवार से हंगामेदार शुरुआत हुई । कार्यवाही के प्रारंभ में संपूर्ण छह छंदों में वंदे मातरम् का गायन किया गया, जिसके बाद राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने सदन को संबोधित किया । राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, हालात बिगड़ते देख कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई । अभिभाषण में राज्यपाल ने सरकार की विकास उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं से आए बदलावों और संकल्प पत्र 2023 में किए गए वादों पर अब तक हुए कार्यों व आगामी लक्ष्यों का उल्लेख किया । सत्र की शुरुआत में सदन में विभिन्न हस्तियों और नेताओं के निधन पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने श्रद्धांजलि अर्पित की । इससे पहले विधानसभा पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यपाल का स्वागत किया ।
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष का हंगामा
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि देश आज उस दहलीज पर खड़ा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत काल की संज्ञा दी है। उन्होंने मध्यप्रदेश में उद्योगों के अनुकूल वातावरण, भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, वर्ष 2047 तक प्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य, वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने, पीएम जनमन योजना के तहत 1.35 लाख आवास निर्माण, उज्जैन में शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने तथा नई शिक्षा नीति के तहत किए गए कार्यों का उल्लेख किया ।
इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए आरोप लगाया कि नल-जल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा अभिभाषण में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी, हालांकि हंगामे के बीच राज्यपाल ने अपना भाषण जारी रखा। राज्यपाल के सदन से जाने के बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, जहां विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो हिस्सा पढ़ा नहीं जा सका, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा, जिसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
6 मार्च तक चलेगा सत्र
मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा,जिसकी शुरुआत पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण से हुई । सत्र के दौरान विधानसभा में कुल 3478 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं,वहीं 236 ध्यानाकर्षण,10 स्थगन प्रस्ताव और 41 अशासकीय संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा शून्य काल में सदन में 83 महत्वपूर्ण सवाल उठाए जाएंगे, जिससे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं ।








