BHOPAL : मध्यप्रदेश की राजनीति और विकास की दिशा तय करने वाला वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट आज विधानसभा में पेश कर दिया गया है। डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे “सबका बजट–सबके लिए” बताया है । डॉ. मोहन यादव सरकार का यह तीसरा बजट है, जिसमें किसान, युवा, महिला और गरीब—इन चार स्तंभों पर विशेष फोकस रखा गया है । सरकार ने 1 लाख किसानों को सोलर पंप देने, लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान करने और कोई नया टैक्स नहीं लगाने की घोषणा की है। वहीं, बजट पेश होते ही सदन में विपक्ष का हंगामा भी देखने को मिला ।
मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट पेश करते हुए डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे “सबका बजट–सबके लिए” की भावना से तैयार दस्तावेज बताया । उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य का विज़न डॉक्यूमेंट है । डॉ. मोहन यादव सरकार का यह तीसरा बजट है और सरकार का दावा है कि यह बजट विकास, विश्वास और अवसर—इन तीन स्तंभों पर आधारित है। बजट तैयार करने से पहले आम जनता से सुझाव लिए गए और विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की गई, ताकि हर वर्ग की अपेक्षाओं को शामिल किया जा सके।
बजट में किसानों को केंद्र में रखते हुए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। 1 लाख किसानों को सोलर पंप देने का ऐलान किया गया है, जिससे सिंचाई सुविधाएं मजबूत होंगी और बिजली पर निर्भरता कम होगी ।सरकार का कहना है कि यह वर्ष किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाएगी । सिंहस्थ, जल जीवन मिशन और ग्रामीण सड़कों के निर्माण के जरिए गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है । मत्स्य उत्पादन, पशुपालन और सहकारी क्षेत्र के लिए भी अलग से प्रावधान किए गए हैं, ताकि किसानों की आय के स्रोत बढ़ सकें । लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बजट की प्रमुख घोषणाओं में शामिल है।
सरकार का दावा है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मातृत्व सहायता, पोषण योजनाएं और महिला स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। नारी कल्याण से जुड़ी योजनाओं में व्यापक बजट आवंटन के जरिए सरकार महिला मतदाताओं को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विकास की धारा में उनकी भूमिका केंद्रीय है।
प्रदेश को देश का तीसरा सबसे युवा राज्य बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराना सरकार का संकल्प है।उद्यम क्रांति योजना के तहत हजारों युवाओं को ऋण दिए जाने की जानकारी दी गई । इंडस्ट्रियल पार्क, आईटी पार्क और निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया है।सरकार का दावा है कि उद्योग वर्ष के दौरान आए निवेश का असर अब जमीन पर दिखाई देगा और आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।
बजट में सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है।मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना के तहत दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों के उन्नयन और नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना की घोषणा की गई है।प्रधानमंत्री आवास योजना और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए भी पर्याप्त बजट आवंटित किया गया है, ताकि बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा सके।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है।सरकार ने दावा किया कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।राजस्व बढ़ाने के लिए निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई गई है।सरकार का कहना है कि आर्थिक प्रबंधन संतुलित है और कर्ज की स्थिति नियंत्रण में है।
बजट भाषण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने विधायक निधि में बढ़ोतरी नहीं किए जाने और प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को मुद्दा बनाया।खाली डिब्बे और गुल्लक लेकर पहुंचे कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधायकों को शांत रहने की अपील की, लेकिन कुछ समय तक सदन में शोरगुल जारी रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बजट आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। महिला, युवा और किसान वर्ग को साधने की स्पष्ट कोशिश नजर आती है।सरकार विकास की उपलब्धियों को गिनाकर सकारात्मक माहौल बनाना चाहती है, जबकि विपक्ष कर्ज और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक जंग शुरू हो चुकी है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सामने राजस्व संग्रह, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण योजनाओं के संतुलन जैसी चुनौतियां हैं।सरकार का दावा है कि निवेश और बुनियादी ढांचे पर जोर देने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।अगर घोषित योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज हो सकती है।हालांकि, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
कुल मिलाकर, वित्तीय वर्ष 2026–27 का यह बजट सरकार की विकास दृष्टि और राजनीतिक प्राथमिकताओं का मिश्रण नजर आता है । जहां सरकार इसे आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश की दिशा में निर्णायक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे कर्ज आधारित बजट करार दे रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि घोषणाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं और आम जनता को कितना प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। फिलहाल, बजट ने प्रदेश की राजनीति और विकास की दिशा—दोनों को नई बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।








