Ujjain:- महाकाल की नगरी उज्जैन अब सिर्फ धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए करीब 5,017 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन का निर्माण प्रस्तावित है। करीब 98.73 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर उज्जैन की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। लेकिन प्रोजेक्ट की राह में भूमि अधिग्रहण से जुड़ा विवाद सामने आया है। किसानों की ओर से दायर तीन याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब नजरें हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं।
हाईकोर्ट में तीन याचिकाओं पर सुनवाई
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। 11 अगस्त को करीब 20 मिनट तक चली सुनवाई में किसानों और सरकार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब अदालत के निर्णय के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी और इसका परियोजना के निर्माण कार्य पर क्या असर पड़ेगा।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रोजेक्ट का एक बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। प्रशासन की ओर से परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है, जबकि प्रभावित किसानों ने अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रस्तावित सड़क के अलाइनमेंट को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
किसानों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर उठाए सवाल
किसानों की ओर से हाईकोर्ट में मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से पहले दावे और आपत्तियों की सुनवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कलेक्टर स्तर पर होनी चाहिए थी, लेकिन यह प्रक्रिया एसडीओ स्तर पर की गई। किसानों का आरोप है कि इसके बाद अंतिम आदेश कलेक्टर की ओर से जारी किए गए।
किसानों की ओर से इसे भूमि अधिग्रहण कानून और पूर्व के न्यायिक आदेशों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं बताया गया है। उनका कहना है कि अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र और पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
सड़क के अलाइनमेंट को लेकर भी विवाद
भूमि अधिग्रहण के अलावा किसानों ने उज्जैन-जावरा फोरलेन के प्रस्तावित अलाइनमेंट पर भी सवाल उठाए हैं। किसानों का तर्क है कि अधिग्रहण वाले क्षेत्रों के आसपास पहले से सरकारी सड़क मौजूद है। ऐसे में अगर सड़क के अलाइनमेंट में मामूली बदलाव किया जाए, तो कई किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि को अधिग्रहण से बचाया जा सकता है।
किसानों का कहना है कि सड़क का निर्माण जरूरी है और वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के साथ उनकी कृषि भूमि और हितों की भी रक्षा होनी चाहिए। इसी आधार पर किसानों ने न्यायालय के सामने अपनी आपत्तियां रखी हैं।
मुआवजे को लेकर भी किसानों की नाराजगी
भूमि अधिग्रहण के साथ मुआवजे का मुद्दा भी किसानों की नाराजगी की एक बड़ी वजह है। प्रभावित किसानों का दावा है कि जमीन के बदले उन्हें चार गुना मुआवजा दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन कथित तौर पर दोगुना मुआवजा दिया जा रहा है।
हालांकि मुआवजे की वास्तविक राशि संबंधित भूमि की प्रकृति, लागू भूमि अधिग्रहण प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर तय होगी। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले के साथ-साथ मुआवजे से जुड़े प्रावधानों पर भी किसानों और प्रशासन की नजर बनी हुई है।
सरकार ने बताया सिंहस्थ और जनहित से जुड़ा प्रोजेक्ट
दूसरी ओर सरकार ने किसानों की याचिकाओं का विरोध किया है। सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उज्जैन-जावरा फोरलेन सिर्फ एक सामान्य सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और व्यापक जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है।
सरकार का पक्ष है कि सिंहस्थ के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और यातायात व्यवस्था बेहद जरूरी है। सरकार ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। हालांकि अंतिम फैसला अब हाईकोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा उज्जैन
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन की अहमियत सिर्फ सिंहस्थ 2028 तक सीमित नहीं है। इस परियोजना के जरिए उज्जैन की दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी होने की उम्मीद है।
अगर परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो उज्जैन को पश्चिमी मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से बेहतर संपर्क मिलेगा। इसका फायदा श्रद्धालुओं के अलावा सामान्य यात्रियों, व्यापारियों और माल परिवहन को भी मिल सकता है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से क्षेत्र में आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सिंहस्थ 2028 के लिए अहम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट
सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए सड़क और यातायात व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन की बड़ी प्राथमिकता है।
इसी वजह से उज्जैन-जावरा फोरलेन को सिंहस्थ की तैयारियों में अहम माना जा रहा है। बेहतर फोरलेन कनेक्टिविटी से उज्जैन आने वाले वाहनों को सुगम मार्ग मिल सकेगा और मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
98.73 किमी लंबा, ₹5,017 करोड़ का प्रोजेक्ट
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन की कुल लंबाई करीब 98.73 किलोमीटर प्रस्तावित है। इस परियोजना पर लगभग 5,017 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य उज्जैन और जावरा के बीच बेहतर और तेज सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
परियोजना पूरी होने के बाद इस क्षेत्र में यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। इसके अलावा सड़क के आसपास व्यापार, लॉजिस्टिक्स और अन्य आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
कुछ हिस्सों में निर्माण गतिविधियां शुरू
खास बात यह है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी याचिकाएं हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद प्रोजेक्ट के कुछ हिस्सों में निर्माण गतिविधियां शुरू होने की जानकारी सामने आई है। चौकी जुर्नादा के पास सड़क निर्माण के लिए बेस तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
बारिश का दौर खत्म होने के बाद निर्माण कार्य में और तेजी आने की संभावना है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला उन हिस्सों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की आपत्तियां अभी बनी हुई हैं।
10 जुलाई को हुआ था भूमि पूजन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 जुलाई को किया था। करीब 98.73 किलोमीटर लंबे और लगभग 5,017 करोड़ रुपये की लागत वाले इस ग्रीनफील्ड फोरलेन को उज्जैन के भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य उज्जैन को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के साथ सिंहस्थ 2028 के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना है। वहीं लंबी अवधि में यह कॉरिडोर उज्जैन की क्षेत्रीय और आर्थिक कनेक्टिविटी को भी मजबूत कर सकता है।







